
नोएडा पुलिस ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की वॉटरलॉगिंग में डूबने से हुई मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दो वांछित आरोपियों — रवि बंसल और सचिन करणवाल — को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर लापरवाही और अवैध निर्माण से जुड़े गंभीर आरोप हैं।
जब तक मौत नहीं होती, तब तक फाइलें भी पानी में डूबी रहती हैं।
पानी में डूबा सिस्टम, युवक ने गंवाई जान
युवराज मेहता की मौत उस वक्त हुई जब भारी जलभराव वाले इलाके में वह फंस गए। स्थानीय लोगों और रिपोर्ट्स के मुताबिक सड़कें तालाब बनी हुई थीं। ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल था। मदद समय पर नहीं पहुंची। यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की सामूहिक लापरवाही की तस्वीर बन गया।
NGT ने लिया स्वतः संज्ञान
मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) ने इस मामले में suo motu cognizance लेते हुए सख्त रुख अपनाया है।
NGT ने नोटिस जारी किया है नोएडा प्राधिकरण। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB), सिंचाई विभाग सहित कुल 5 जिम्मेदार अधिकारियों को प्राधिकरण ने जलभराव, ड्रेनेज प्लान और पर्यावरणीय नियमों के पालन पर जवाब मांगा है।
अवैध निर्माण और लापरवाही पर सवाल
जांच में सामने आया है कि इलाके में अवैध निर्माण, प्राकृतिक जल निकासी में बाधा और जिम्मेदार विभागों की अनदेखी ने मिलकर इस हादसे को जन्म दिया।

यह मौत पानी से नहीं हुई, यह मौत प्लानिंग की सूखी फाइलों से हुई।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी। NGT की रिपोर्ट के आधार पर और कार्रवाई संभव। अधिकारियों पर व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय हो सकती है।
युवराज की मौत अब सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि नोएडा के इंफ्रास्ट्रक्चर की परीक्षा बन चुकी है।
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